About Village

धनौरी गांव जींद-पटियाला हाईवे से कैथल रोड पर 5 किलोमीटर दूर बसा हुआ है. जिसकी गाथा बड़ी दिलचस्प है.यह अत्यंत प्राचीन धार्मिक ऐतिहासिक गांव है. यह गांव ढांडा गोत्र का हरियाणा प्रदेश में आधार गाँव कहलाता है

ऐतिहासिक तथ्य संकेत करते है की मढाढ खाप के 360 खेड़े थे , जिनको गांव के नाम से अभिधीत किया जाता रहा है.धनौरी गांव मडाड खाप के तपे का गांव है मढाढ खाप का सबसे बड़ा गांव व् खाप का मुख्यालय कलायत में था, जहां पर दो बावनी ज़मीन (52 +52 हज़ार बीघा) थी, कलायत में राजपूत(रांगड़) जाती के लोग रहते थे, ऐसा सुना जाता है और बही भाटों से भी इस बात की पुष्टि होती है कि नईया रांगड़ नामक व्यक्ति ने यह गांव आबाद किया था, नईया के पांच पुत्र थे, सबसे बड़े पुत्र का नाम धन्ना था.जिसके नाम पर धनौरी गांव नामकरण हुआ.

रांगड़ों के व्यवहार से व्यथित होकर ढांडा जन यहाँ से रोष स्वरुप पलायन कर गए. जब वे अपनी बैलगाड़ी से सामान सहित अपने गंतव्य स्थान वराह कलां कि और प्रस्थान कर रहे थे तो दुर्भाग्यवश एक छोटा बच्चा गाड़ी से गिरकर अपने परिजनों से बिछुड़ गया. धूल( रेत) में सना होने के कारण उसका ब्योंग (उपनाम) धुलिया/धूलके पड़ गया.धन्ना रांगड़ जब उस रास्ते से गुजर रहा था तो उसने उस बच्चे को देखा और अपने घर ले गया. जिसका उसने पालन पोषण किया जो ढांडा गोत्र का था.

अगले पड़ाव गांव बराह कलां पहुंचने पर ढांडा परिजनों को जब बच्चे का पता चला तो वो उसे तलाश करते हुए गांव धनौरी में पहुंचे. पता चलने पर वे धन्ना रांगड़ के पास गए तथा बचा लौटाने को कहा. लेकिन उसने बच्चे को देने से मना कर दिया.धन्ना रांगड़ ने कहा कि वह मेरा धर्म का बेटा है. में इसका पुत्रवत पालन पोषण करूंगा और उसका नाम धुलिया रख दिया.उसने बच्चे के माता पिता को आशवस्त करते हुए यह भी कहा कि यह मेरा पैतृक सम्पत्ति का आधे भाग का उत्तराधिकारी होगा.यही से धनौरी गांव कि और ढांडा गोत्रीय जन कि गाथा शुरू होती है.

गांव कि आबादी लगभग 21 हज़ार है. गांव में हरचन्द और लाखन दो तरफ है तथा सात पत्तिया है. और सभी 7 पत्तियों के सात नम्बरदार है. गांव में भिन्न-2 देवी-देवताओं के अनुमानत: 27 मंदिर है.इतने पूजा स्थल हरियाणा के किसी गांव में नहीं होंगे.

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